“हिंदुत्व की शाश्वत प्रासंगिकता” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी"
सुनील मिश्रा नई दिल्ली:
दिल्ली के आई आई टी में आज दिनांक 4 जनवरी को वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ हिन्दू एकेडमिशियन (WAHA) के तत्वावधान में “हिंदुत्व की शाश्वत प्रासंगिकता” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें WAHA के राष्ट्रीय समन्वयक प्रोफेसर नचिकेत तिवारी जी ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के विषय को व्याख्यायित करते हुए कहा कि हिंदुत्व और भारतीय संस्कृति के विषय में अनेक भ्रांतियां फैली हुई है। हिंदुत्व का महत्वपूर्ण अधिष्ठान ज्ञान है। जिसमें ज्ञान व महानता के लिए वेद, बौद्ध के विचार, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय संत और विभिन्न भाषाओं का समावेश हैं। हिंदुत्व की पहचान ज्ञान है। साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष के. के. अग्रवाल ने कहा कि भारत को विश्व गुर अगर बनाना है तो हिंदुत्व के सिद्धांतों को लेकर चलना पड़ेगा। हिंदुत्व ही धर्म है। भारत में शिक्षा एक जीवन शैली है, और राष्ट्र की शिक्षा नीति श्री राम जी के सिद्धांतों पर आधारित होगी। प्रथम सत्र “सामाजिक समरसता: हिन्दू जीवन शैली का सार” पर केंद्रित रहा। जिसमें राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष, किशोर मकवाना ने कहा कि सामाजिक समरसता के लिए बंधुत्व, एकात्मकता भाव होना चाहिए और इस सब के लिए डॉ. भीमराव अम्बेडकर संघर्ष करते है। हिंदुत्व के लिए यह संघर्ष जरूरी है। सामाजिक एकत्व भारतीय राष्ट्रीय एकता, समरसता के लिए आवश्यक है। डॉ. के जी सुरेश ने कहा सामाजिक समरसता समय के साथ बनेगी। भारत समरसता के क्षेत्र में सही दिशा में बढ़ रहा है। हमें शिक्षा पद्धति में मूलभूत परिवर्तन लाना होगा।
दस गुरु परंपरा का उत्तर पश्चिम भारत में बड़ा महत्व मानते है। यह परंपरा ना रही होती तो शायद वर्तमान पंजाब का सामाजिक, भौगोलिक समीकरण अत्यंत कष्टदायी होता । वर्तमान भारत की संस्कृति और धर्म की अक्षुण्णता में हजारों वर्षों का संघर्ष है और यह धर्म के कारण संभव हो पाया। मुगल शासकों ने भारत के धर्म प्रतीकों को नष्ट किया है। भारतीय हिंदुत्व सिद्धांतों ने अपनी संस्कृति को बचाया। संगोष्ठी का दूसरा सत्र पंजाब:संस्कृति चुनौतियां और परिवर्तन विषय पर डॉ. अशमिंदर सिंह बहल का मानना है पंजाब के युवाओं में नशा पाकिस्तान के कारण बढ़ रहा है। युवा पंजाब से निरन्तर विस्थापित हो रहे हैं। इसको दूर करने के लिए सरकार को तुरंत निर्णय लेना होगा धर्म परिवर्तन पंजाब की संस्कृति उसके युवाओं को भ्रमित करने का कार्य कर रही है पंजाब में नशे की प्रवृत्ति पड़ोसी मुल्क निरंतर विस्थापन धर्म परिवर्तन कारण रहा है विश्व हिंदू परिषद अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय आलोक जी का कहना है कि पंजाब की समस्या को निर्मम होकर सोचा होगा एक ओंकार मंत्र का महत्व जिसमें निर्भय की बात आती है गुरु परंपरा गुरु रविदास गुरु नानक का महत्व पंजाब की परंपरा को बढ़ाने के लिए जरूरी है पंजाब जो संस्कृत भाषा धर्म आदि से एक है उसमें कुछ लोगों ने राजनीति स्वार्थ सिद्ध करने के लिए विद्वेष फैलाया। 1956 में संपूर्ण भारत को भाषाई आधार से चिन्हित किया गया। परन्तु पंजाब को उसकी भाषा से अलग दृष्टिकोण से देखा गया। धर्म परिवर्तन जहां पर हो रहे हैं हमें वहां जाना पड़ेगा बजरंग दल पंजाब में नशा मुक्ति के लिए निरंतर कार्यरत है तीसरा सत्र “हिंदू मूल्य सामाजिक परिवर्तन की दिशा” विषय पर इग्नू की कुलपति प्रो. उमा कांजीलाल जी ने अपने विचार रखे। संगोष्ठी में 300 से अधिक विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रोफ़ेसर ने सहभागिता की।
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