स्वच्छ भारत से सर्कुलर भारत की ओर: TERI SAS के IRIS समिट ने सतत प्रथाओं को दिया बढ़ावा
सुनील मिश्रा नई दिल्ली : TERI स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़ (TERI SAS) के अंतर्गत IPCA सेंटर फॉर वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसर्च (ICWMR) ने आज इंडिया हैबिटेट सेंटर में इंटरनेशनल रीसाइक्लिंग इनक्यूबेशन समिट (IRIS) 2026 का शुभारंभ किया। दो दिवसीय यह समिट ‘सर्कुलर अर्थव्यवस्था के लिए सतत अपशिष्ट आपूर्ति-श्रृंखला लॉजिस्टिक्स और लो-कार्बन पाथवे के एकीकरण’ पर केंद्रित है। इसमें सरकार, उद्योग, अकादमिक जगत, मीडिया और सामुदायिक समूहों सहित विभिन्न क्षेत्रों के 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं,
उद्घाटन सत्र का वातावरण आशावादी और कार्योन्मुख रहा। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित टोकन साहू, राज्य मंत्री, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने शहरी नियोजन में सततता को समाहित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “स्वच्छ भारत से सर्कुलर भारत की हमारी यात्रा अत्यंत आवश्यक है,” और यह रेखांकित किया कि शहर केवल उपभोग के केंद्र न होकर संसाधनों के पुन: उपयोग और पुनर्जीवन के क्षेत्र बनने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में माननीय प्रधानमंत्री द्वारा आरंभ किया गया स्वच्छ भारत मिशन केवल एक अभियान नहीं, बल्कि स्वच्छ भारत की दिशा में एक क्रांति है। “विकसित भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने का मार्ग सर्कुलर इकॉनॉमी से होकर जाता है। साथ ही, IRIS 2026 जैसे मंचों को सरकार, अकादमिक जगत, अनुसंधान संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों को एक साथ लाकर सतत विकास और विकसित भारत की दिशा में विचार-विमर्श के लिए उपयुक्त बताया।
स्वागत संबोधन में प्रो. अरुण कंसल, निदेशक, ICWMR, TERI SAS ने समिट को समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा, “IRIS 2026 का उद्देश्य प्रौद्योगिकी, नीति और सामुदायिक कार्रवाई के बीच सेतु बनाकर उसके मूल्य को उजागर करना है। हम यहाँ इनक्यूबेशन से एक्सेलेरेशन की ओर बढ़ने आए हैं।”
डॉ. विभा धवन, कुलाधिपति, TERI SAS ने सर्कुलर ट्रांजिशन में शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रहकर उद्योग और समुदायों के साथ मिलकर व्यावहारिक समाधान विकसित करने चाहिए।
सी. आर. मोहंती, UNCRD ने भारत के प्रयासों को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सर्कुलर इकॉनॉमी मॉडल में भारत का पैमाना और नवाचार ग्लोबल साउथ के लिए परिवर्तनकारी सबक प्रस्तुत करता है। “अपशिष्ट प्रबंधन में लो-कार्बन पाथवे का एकीकरण जलवायु शमन और लचीली अर्थव्यवस्थाओं के निर्माण की प्रभावी रणनीति है,”
थीम संबोधन में श्री आशीष जैन, फाउंडर डायरेक्टर, IPCA ने कहा, “भविष्य उन व्यवसायों का है
जो अपशिष्ट को एक रणनीतिक संसाधन के रूप में देखते हैं। सर्कुलर इकॉनॉमी में सततता कोई लागत नहीं—बल्कि हमारी सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति और पृथ्वी के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने ‘वेस्ट टू वेल्थ एंड हेल्थ’ के लक्ष्य को सामूहिक और जिम्मेदार प्रयासों से प्राप्त करने की आवश्यकता बताई।
प्रो. सुमन धर, कुलपति, TERI SAS ने कहा, “हमारे छात्र केवल सततता का अध्ययन नहीं कर रहे—वे उसे डिज़ाइन कर रहे हैं। सर्कुलर ट्रांजिशन का नेतृत्व वही करेंगे जो तकनीकी कौशल को प्रणालीगत दृष्टि के साथ जोड़ सकें, और TERI SAS ऐसे परिवर्तनकर्ताओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
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