फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला में 55-वर्षीय महिला की सफल सर्जरी के साथ पेट से दुर्लभ 14.5 किलोग्राम का ट्यूमर निकाला

सुनील मिश्रा नई दिल्ली, 17 जून, 2026:  फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पीटल, ओखला में सर्जिकल ओंकोलॉजी के डायरेक्टर डॉक्टर अर्चित पंडित और उनकी डॉक्टरों की टीम ने 55-वर्षीय महिला की 10 घंटे चली जटिल एवं चुनौतीपूर्ण सर्जरी कर 14.5 किलोग्राम वज़न का पेट का कैंसरग्रस्त ट्यूमर निकालने में सफलता हासिल की है।  जो कि भारत में निकाले गए सबसे बड़े ट्यूमर में से है। ऐसे ट्यूमर अत्यंत दुर्लभ होते हैं, और पेट के इस प्रकार के ट्यूमर 1% से भी कम होते हैं तथा ये दुर्लभ किस्म के सारकोमा मामलों का मामूली हिस्सा होते हैं।मरीज कुलदीप कौर, जो कि पेशे से नर्स हैं, पिछले करीब चार वर्षों से सांस लेने में गंभीर परेशानी और चलने-फिरने में भी दिक्कत का सामना कर रही थीं, क्योंकि उनके पेट में तेजी से बढ़ रहे ट्यूमर ने उनकी मोबिलिटी के साथ-साथ लाइफ क्वालिटी को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया था। इस ट्यूमर के बड़े आकार तथा इसे हटाने की जटिल प्रक्रिया को देखते हुए, वह दिल्ली के कई अस्पतालों में इससे पहले उपचार कराने से इंकार करती आयी थीं। आखिरकार उन्होंने फोर्टिस एस्कॉर्ट्स ओखला से संपर्क किया, जहां विस्तृत जांच जिसमें पीईटी-सीटी, सीटी स्कैन, तथा एमआरआई शामिल था, कराने पर एक बड़े आकार के ट्यूमर की पुष्टि हुई  डॉ अर्चित पंडित, डायरेक्टर – सर्जिकल ओंकोलॉजी; डॉ कुशल बैरोलिया, कंसल्टेंट, जीआई सर्जिकल ओंकोलॉजी तथा डॉ विनीत गोयल, कंसल्टेंट, सर्जिकल ओंकोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला, दिल्ली ने उनके पेट का भारी-भरकम ट्यूमर निकालने के लिए जटिल लैपरोटोमी (यह पारंपरिक ओपन सर्जिकल प्रक्रिया होती है जिसमें पेट में एक बड़े आकार का चीरा लगाया जाता है) की गई और मरीज के पेट के अंदर धंसे हुए 30x30 से.मी. आकार के कैंसरग्रस्त ट्यूमर को निकाला। इस ट्यूमर ने बांयी किडनी (गुर्दे) को पूरी तरह से घेर रखा था, इसलिए इस गुर्दे को भी निकाला गया। साथ ही, मरीज के गर्भाशय में एक बड़े आकार का फाइब्रॉयड भी था, इसलिए डॉक्टरों ने सर्जरी के दौरान गर्भाशय, दोनों डिंबग्रंथियों, तथा फैलोपियन ट्यूब्स को भी निकाल दिया। ट्यूमर को आसपास के अंगों तथा उनसे जुड़ी रक्तवाहिकाओं से सावधानीपूर्वक अलग किया गया। सर्जरी के एक सप्ताह बाद मरीज को स्थिर अवस्था में अस्पताल से छुट्टी मिल गई। डॉ अर्चित पंडित, डायरेक्टर – सर्जिकल ओंकोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला, दिल्ली ने बताया, “यह केवल ट्यूमर के असामान्य रूप से बड़े आकार की वजह से हीइतने बड़े आकार के ट्यूमर को निकालते समय मरीज के महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षित रूप से बचाने के लिए काफी अधिक सर्जिकल/ओंकोलॉजिकल दक्षता जरूरी थी। सर्जिकल ओंकोलॉजी में इतने बड़े पैमाने की सर्जरी अत्यंत दुर्लभ है, और भारत में सामने आए पेट के इतने बड़े ट्यूमर को निकालने के लिए की गई यह सर्जरी फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला के लिए उल्लेखनीय क्लीनिकल उपलब्ध है। इस मामले ने आधुनिक कैंसर सर्जरी में हुई
प्रगति के साथ-साथ जटिल किस्म की ओंकोलॉजिकल चुनौतियों से घिरे मरीजों के लिए जीवन-रक्षक परिणाम संभव बनाने में मल्टीडिसीप्लीनरी प्रक्रियाओं की ताकत को भी दर्शाया है।
डॉ कुशल बैरोलिया, कंसल्टेंट, जीआई सर्जिकल ओंकोलॉजी फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला, दिल्ली ने कहा, “ट्यूमर को निकालना इस पूरी चुनौती का एक हिस्सा था। असली परीक्षा आसपास के अंगों और महत्वपूर्ण रक्तवाहिकाओं को सुरक्षित बचाने की थी, जिससे यह सुनिश्चित किया कि मरीज इस प्रकार की जटिल सर्जरी के बाद सही तरीके से स्वास्थ्यलाभ कर सकें।”
डॉ विक्रम अग्रवाल, वाइस प्रेसीडेंट एवं हेड – स्ट्रैटेजिक बिजनेस यूनिट, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, ओखला, नई दिल्ली ने कहा, “इस मामले ने दुर्लभ तथा हाइ-रिस्क कैंसरग्रस्त ट्यूमर के सफलतापूर्वक प्रबंधन के लिए समय पर सर्जिकल हस्तक्षेप, मल्टीडिसीप्लीनरी विशेषज्ञता और उन्नत ओंकोलॉजिकल केयर की महत्वपूर्ण भूमिकाओं को रेखांकित किया है।

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