चार देशों में 1 million+ यूजर्स, महिलाओं की प्राइवेसी और क्रिएटर्स की कमाई पर जोर
नई दिल्ली। महिलाओं की ऑनलाइन आजादी और डेटा सुरक्षा के साथ क्रिएटर्स को कमाई में हिस्सेदारी देने वाला भारतीय सोशल सुपर-ऐप ZKTOR दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ बढ़ा रहा है। प्लेटफॉर्म से 1 million+ यूजर्स जुड़ चुके हैं। महिलाएं और Gen Z प्राइवेसी तथा अपनी पसंद की फीड से जुड़ रहे हैं, जबकि क्रिएटर्स अपने पेज, चैनल और कंटेंट का सेटअप मजबूत करने में जुटे हैं। Google Play Store की Top Free Social Apps सूची में पिछले कुछ महीनों से भारत में टॉप 100 और नेपाल, बांग्लादेश व श्रीलंका में टॉप 30 में इसकी लगातार मौजूदगी है। चार देशों में यह पहुंच उस मॉडल के साथ बढ़ी है जिसमें यूजर की पसंद, निजी डेटा की सुरक्षा और स्थानीय कमाई को एक साथ रखा गया है।
नो-URL तकनीक और Privacy and Data Safety by Design से महिलाओं व Gen Z के बीच लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। फोटो-वीडियो स्क्रैपिंग से बचाव के साथ Zero Knowledge Server Architecture और मल्टी-लेयर एन्क्रिप्शन प्राइवेसी का तकनीकी आधार हैं। लोकल डेटा सेंटर संबंधित देश का डेटा वहीं रखने की व्यवस्था देते हैं। HOLA AI की वीडियो डिटेक्शन लेयर (VDL) असामाजिक व एडल्ट कंटेंट और फेक न्यूज फिल्टर करती है। फीड में भी चुनाव यूजर का है। Zero Behavioural Tracking के साथ नैचुरल फीड पसंद के अनुसार चलती है, एल्गोरिद्म से अनचाहा कंटेंट नहीं थोपती। विज्ञापन के लिए ZHAN, यानी ZKTOR Hyperlocal Advertisement Network, बिना ट्रैकिंग लोकल विज्ञापनों का प्राइवेसी-आधारित मॉडल देता है। तय नियमों के तहत कंटेंट की कमाई का 70% हिस्सा क्रिएटर्स के लिए है।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में सॉफ्टा के सीईओ सुनील कुमार सिंह ने मीडिया के सामने 1 million+ यूजर्स का पड़ाव, महिला एवं बाल शिकायत विंग की व्यवस्था और तकनीकी साक्ष्य पेश किए। उन्होंने सोशल मीडिया के साथ निजी संवाद, खोज, स्थानीय कारोबार और छोटे उद्यमों के काम समेटने वाला डिजिटल इकोसिस्टम भी प्रस्तुत किया। इसमें सोशल सुपर-ऐप के अलावा फुल-फीचर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेंजर SNDESH, साक्ष्य-आधारित सर्च इंजन KHOZU.com, हाइपरलोकल ई-कॉमर्स मॉडल EZOWM और MSME के लिए ऑल-इन-वन बिजनेस सूट ZWATO शामिल हैं। इन सभी सॉफ्टवेयर का साझा आधार Privacy and Data Safety by Design है। सिंह के 12 वर्षों के शोध और मेहनत से तैयार यह इकोसिस्टम अब क्षेत्रीय विस्तार ले रहा है।
निर्माण के लिए सिंह ने भारत सरकार, यूरोपीय संघ या फिनलैंड सरकार से कोई अनुदान नहीं लिया और विदेशी वेंचर कैपिटल (VC) से फंड लेने से इनकार किया। सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कंपनी निवेश के खिलाफ नहीं है। वह बाहरी दबाव और जल्द मुनाफे की मजबूरी से बचना चाहते हैं, ताकि यूजर्स के डेटा और प्राइवेसी पर किसी शर्त से समझौता न हो।
धीमी रफ्तार पर भी सुरक्षित, आत्मनिर्भर और स्वाभाविक विस्तार उनकी प्राथमिकता है। इसके लिए उनके नेतृत्व में ISRO से प्रेरित लो-कॉस्ट ऑपरेटिंग मॉडल बना है। उद्देश्य कम खर्च में बड़ी टेक कंपनियों जैसी संचालन क्षमता और लंबे समय तक टिकाऊ कारोबार है। सिंह के अनुसार, इस व्यवस्था में कंपनी बिग टेक के मुकाबले 7 से 8 गुना कम खर्च में ऑपरेट कर सकती है। विजन 2047 का समर्थन कर चुके सिंह भारत की तकनीकी सॉफ्ट पावर और वैश्विक भूमिका में इस क्षेत्रीय विस्तार का योगदान चाहते हैं। उनकी महत्वाकांक्षा स्थानीय तकनीकी क्षमता से आत्मनिर्भर भारत को बल देने की है। सुरक्षित, गरिमापूर्ण इंटरनेट के लक्ष्य में महिलाओं की ऑनलाइन आजादी और क्रिएटर्स की कमाई साथ हैं। यूजर्स के डेटा पर समझौता किए बिना इस भागीदारी को बढ़ाना उनकी प्राथमिकता है।
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